सरकारी बैंकों को 2020 तक चाहिए 1.2 लाख करोड़ रुपए

सरकारी बैंकों को 2020 तक चाहिए 1.2 लाख करोड़ रुपए

एसबीआईऔर बैंक ऑफ बड़ौदा समेत 11 सरकारी बैंकों को बैलेंस शीट सुधारने के लिए 2020 तक सरकार से 1.2 लाख करोड़ रुपए की पूंजी की जरूरत होगी।

यह अनुमान वैश्विक एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने लगाया है।

यह रकम सरकार के आकलन का लगभग दोगुना है। सरकार ने घोषणा की थी कि मार्च 2019 तक वह 22 सरकारी बैंकों को 70,000 करोड़ रुपए की पूंजी उपलब्ध कराएगी। इसमें से 25,000 करोड़ बैंकों को दिए जा चुके हैं। यानी 45,000 करोड़ रुपए और दिए जाने हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जरूरत हुई तो बैंकों और फंड मुहैया कराया जाएगा।

मूडीज ने कहा है, ‘मार्च 2016 को खत्म वित्त वर्ष के नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि बैंकों की एसेट क्वालिटी आने वाले एक साल तक दबाव में रहेगी। ज्यादा प्रोविजनिंग से उनका मुनाफा घटेगा। इस तरह आंतरिक स्रोतों से वे कम पूंजी जुटा सकेंगे। ग्यारह सरकारी बैंकों को 1.2 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी।’

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने 2015-16 की दूसरी छमाही में बैंकों को बैलेंस शीट साफ करने को कहा था। इसके लिए उन्हें सभी एनपीए और रिस्ट्रक्चरिंग वाले कर्ज की प्रोविजनिंग करनी थी। प्रोविजनिंग में कर्ज के एक हिस्से के बराबर रकम सुरक्षित रखनी पड़ती है। मूडीज ने जिन 11 बैंकों का विश्लेषण किया है, उनमें से आठ को पिछले साल घाटा हुआ। बाकी तीन का मुनाफा भी घटा है।

घाटे के कारण बेमानी हुई मदद

एजेंसीका कहना है कि अगर सरकार ने ज्यादा रकम मुहैया नहीं कराई तो इन बैंकों को स्थिति कमजोर हो जाएगी। 2015-16 में सरकार ने इन बैंकों को 19,200 करोड़ रुपए दिए, लेकिन इन्हें 20,200 करोड़ का घाटा हुआ जिससे सरकारी मदद बेमानी हो गई। इन 11 बैंकों ने 2014-15 में 29,100 करोड़ रुपए मुनाफा दर्ज किया था। ज्यादातर बैंकों के शेयर भाव भी नीचे चल रहे हैं। इसलिए पब्लिक ऑफर से पैसे जुटाना मुश्किल है।

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